Deepawali “दीपावली” How to celebrate Diwali.

दीपावली

Deepawali

दीपों का यह त्योहार पूरे भारतवर्ष में हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। यह त्योहार पाँच दिन तक चलता है। पहले दिन त्रयोदशी को धन-तेरस व धन्वन्तरि की पूजा। दूसरे दिन रूप चौदस व नर्क चतुर्दशी। तीसरे दिन अमावस्या की महालक्ष्मी की पूजा। अगले दिन गोवर्धन पूजा और पाँचवें दिन भैयादूज अथवा यम द्वितीया। इन पाँचों दिनों का अलग-अलग महत्व है। इसके पीछे धार्मिक कारण हैं।

दीपावली राष्ट्रीय पर्व है। यह सारे भारतवर्ष में बड़े उल्लास और उमंग से मनाया जाता है। छोटे-बड़े, गरीब-अमीर सब इस त्योहार को अपने-अपने साधनों के अनुसार मनाते हैं।

वर्षा ऋतु के बाद बरसाती कीड़े-मकोड़े और गंदगी को दूर करने के लिए दीपावली से पूर्व सफाई होती है, रंग-रोगन, लिपाई-पुताई कर घरों को शुद्ध किया जाता है। आस-पास के सारे वातावरण को शुद्ध किया जाता है। इस प्रकार दीपावली हमारे स्वास्थ्य से जुड़ा त्योहार है।

शरदकाल तक सारे जलाशय भर जाते हैं। वसुंधरा अनाज: समृद्ध हो सुखद भविष्य का आश्वासन देती है। यह सुख-समृद्धि का समय माँ लक्ष्मी का आभार प्रकट करने और उन्हें प्रसन्न करने का समय है।

राम लंका-विजय के बाद अयोध्या लौटते हैं। तब अयोध्यावासियों के लिए तो यह अवसर अपार खुशियों से भरा था। तब अयोध्यावासियों ने राज्य का कोई कोना ऐसा नहीं छोड़ा होगा जिस पर अँधेरा बैठा दिखाई देता। तब से तम पर उजाले की जीत का यह दिन हमें प्रेरणा देता है कि घर-आँगन ही नहीं मन का आँगन भी उजाले से भर लो ।

सैकड़ों कहानियाँ इस उजले त्योहार के साथ जुड़ी हुई हैं। सब कहानियों का संदेश यही है धरती से अंधकार दूर करो। पाप का नाश करो। अत्याचारियों का विनाश करो। प्रदूषण मिटाने और पर्यावरण को का संदेश देती हैं।

शुद्ध करने यह त्योहार वणिक वर्ग का भी है। माँ लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। यह अन्नपूर्णा और कल्याणमयी माता है । वणिक वर्ग इसकी पूजा-अर्चना कर लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। लक्ष्मी-पूजा करने वाला हर प्राणी माता की कृपा और उसके आशीर्वाद की कामना करता है।

प्रकाश का यह पर्व संदेश देता है कि ईर्ष्या, द्वेष और वैमनस्य को भूलकर हम जीवन को आलोकमय बनाएँ। मन के हर अँधियारे का दमन करें। प्रेम और भाईचारे के दीप जलाएँ। खुशियाँ बाँटें। खुद भी सुख जीयें और सबको सुख से जीने का अवसर दें।

माँ लक्ष्मी से समूचे विश्व में सुख-शांति और समृद्धि देने की विनम्र प्रार्थना करें। किसी के भी जीवन में अँधियारा प्रवेश न करे माँ लक्ष्मी से यही आशीर्वाद माँगें ।

कैसे मनाएँ दीपावली

How to celebrate Diwali

  1. लक्ष्मी की तस्वीर रखें।
  2. माल्यार्पण कर दीप जलाएँ।
  3. पूरे आयोजन स्थल में दीप जलाएँ। खूब सजाएँ।
  4. दीपावली राष्ट्रीय पर्व है। यह पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है। यह उमंग और उल्लास का त्योहार है। बच्चों को इस त्योहार के महत्व बताए जाएँ। हर त्योहार के पीछे भाई-चारे का संदेश होता है। इस तथ्य से बच्चों को परिचित कराया जाए।
  5. दीपावली मनाने के पौराणिक-धार्मिक महत्व के साथ-साथ स्वच्छता व प्रदूषण के बारे में भी बताया जाए।
  6. पटाखे चलवाने के साथ-साथ बच्चों को इनसे सावधानी रखने के बारे में भी बताया जाए।
  7. दीपावली के चित्र बनाने व दीपक को सजाने, दीपकों अथवा पूजा के थाल को सजाने की प्रतियोगिता रखें।
  8. दीपकों के साथ होने वाले नृत्य प्रस्तुत किये जाएँ।
  9. कंदील व रंगबिरंगा सजावटी सामान बनवाने की प्रतियोगिता रखें।
  10. हर कक्षा के छात्र अपने-अपने कक्षा-कक्ष को सजाएँ, इसे भी प्रतियोगिता का रूप दिया जा सकता है।
  11. अंत में लक्ष्मी-पूजन व लक्ष्मी की आरती करें।

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