Pustako Ka Mahatva “पुस्तकों का महत्त्व” Essay in Hindi, Best Essay, Paragraph, Nibandh for Class 8, 9, 10, 12 Students.

पुस्तकों का महत्त्व

Pustako Ka Mahatva

पुस्तकें हमारी मित्र हैं। वे अपना अमृत-कोष सदा हम पर न्योछावर करने को तैयार रहती हैं। पुस्तकें प्रेरणा की भंडार होती हैं। उन्हें पढ़कर जीवन में कुछ महान कर्म करने की भावना जागती है। महात्मा गाँधी को महान बनाने में गीता, टालस्टायऔर थोरो का भरपूर योगदान था। मैथिलीशरण गुप्त की ‘भारत-भारती’ पढ़कर कितने ही नौजवानों ने आजादी के आंदोलन में भाग लिया था। पुस्तकें ही आज की मानव-सभ्यता के मूल में हैं। पुस्तकों के द्वारा एक पीढ़ी का ज्ञान दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते-पहुँचते सारे युग में फैल जाता है। तुलसी के ‘रामचरितमानस’ ने तथा व्यास-रचित ‘महाभारत’ ने अपने युग को तथा आने वाली शताब्दियों को पूरी तरह प्रभावित किया। पुस्तकें मानव के मनोरंजन में भी परम सहायक सिद्ध होती हैं। मनुष्य अपने एकांत क्षण पुस्तकों के साथ गुजार सकता है। किसी ने कहा है-‘पुस्तकें जाग्रत देवता हैं। उनसे तत्काल वरदान प्राप्त किया जा सकता है।’

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