Parishram hi Safalta ki Kunji Hai “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” Hindi Essay 500 Words, Best Essay, Paragraph, Anuched for Class 8, 9, 10, 12 Students.

परिश्रम ही सफलता की कुंजी है

Parishram hi Safalta ki Kunji Hai

यह संसार उसका है जो परिश्रमी है। मनुष्य का जीवन समस्याओं से घिरा हुआ है। एक खत्म होती है तो दूसरी सामने आ खड़ी होती है। लेकिन जो परिश्रमी होते हैं वे अपनी समस्याओं को बहुत सावधानी से सुलझा लेते हैं और अपने जीवन में सफल होते चले जाते हैं। जो परिश्रमी नहीं हैं, वे बार-बार केवल अपनी समस्याओं को दूर करने के उपाय सोचते रह जाते हैं, समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है क्योंकि वे उसे दूर करने के लिए श्रम नहीं करते। ऐसे लोग कभी जीवन में सफल नहीं होते। वे हमेशा असफलता का मुँह देखते हैं। जो परिश्रम करता है वही जीवन में सफल होता है। उसकी सफलता का कारण यह होता है कि संघर्षशील होता है। यह ठीक है कि उसे सफलता प्राप्त करने में समय लग जाता है पर देर-सवेर उसे एक न एक दिन सफलता अवश्य प्राप्त होती है।

परिश्रम जीवन को गतिमान बनाए रखता है। व्यक्ति अपना कोई लक्ष्य तय करता है कि मुझे यह काम करना है और वह उस काम को पूरा करने के लिए लग जाता है। उसे पता नहीं चलता कि समय कब खत्म हो गया। जब वह अपने काम को पूरा कर लेता है तब उसे सफलता का आनन्द आ घेरता है। यह आनंद काम करने के कारण हुई तकलीफ शांत कर देता है। परिश्रमी जब अपने काम में लग जाता है तो वह अपनी पूरी क्षमता उसे पूरा करने में लगा देता है। यही नहीं, जब वह काम करता है तो वह चाहता है कि वह जिस काम को करने के लिए तत्पर हुआ है उसे पूरा करे। उसे किसी प्रकार की किसी अन्य से सहायता नहीं लेनी। वह अपने भाग्य का स्वयं विधाता होता है। उसके सामने तो केवल एक ही लक्ष्य होता है कि उसे इस काम में निश्चित सफलता प्राप्त करनी है चाहे इसके लिए उसे कितनी ही मेहनत क्यों न करनी पड़े। परिश्रमी की आशा ही संबल होती है और इस संबल के बल पर वह अपने जीवन में निरन्तर तरक्की करता हुआ चला जाता है। ऐसे परिश्रमी का सारा समाज आदर करता है।

ऐसा व्यक्ति अपने परिवार, अपने मित्र मण्डल में उल्लेखनीय स्थान बना लेता है। संसार में जितने भी बड़े लोग दिखाई देते हैं उन्हें जीवन में सफलता केवल परिश्रम के बल पर मिली है। सामान्य व्यक्ति ने अपने साहस और परिश्रम के बल पर बड़े-बड़े साम्राज्य स्थापित किए। पृथ्वी, प्रकृति का पता लगाने वाले आलसी लोग नहीं थे, परिश्रमी थे। समुद्रों का चक्कर लगाकर उन्होंने नए देशों का पता लगाया। हम दूर नहीं जाते, एक चींटी जो बहुत साधारण जीव होती है अपने परिश्रम के बल पर कितना संघर्ष करती है। अतः अगर व्यक्ति जीवन में सुख चाहता है तो उसे परिश्रम करना होगा क्योंकि परिश्रम के बल पर ही उसे जीवन में सफलता प्राप्त होगी।

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