Hindi Story, Essay on “Bolti Gufa”, “बोलती गुफा” Hindi Moral Story, Nibandh for Class 7, 8, 9, 10 and 12 students

बोलती गुफा

Bolti Gufa

किसी वन में एक सिंह रहता था । बूढ़ा होने के कारण वह शिकार कर पाने में असमर्थ था । वह चार दिन तक भूखा रहा । एक दिन वन में घूमते हुए उसने एक गुफा देखी । वह गुफा में घुसकर बैठ गया । उसने सोचा-यदि गुफा में रहने वाला पशु अंदर आया तो मैं उसे अपना भोजन बना लूँगा।

उस गुफा में एक गीदड़ रहता था । संध्याकाल में जब वह अपनी गुफा की ओर लौट रहा था तो सिंह के पैरों के निशान देखकर उसे कुछ आशंका हुई । उसने ध्यान से देखा तो पाया कि गुफा में सिंह के घुसने के निशान हैं परन्तु गुफा से निकलने के निशान नहीं हैं । वह समझ गया कि गुफा में एक सिंह छिपकर बैठा है । फिर भी अपने मन की तसल्ली के लिए उसने जोर से कहा, “गुफा ! क्या मैं अन्दर आ जाऊँ ?” कुछ देर ठहरकर उसने फिर कहा, “अरी गुफा ! प्रतिदिन तो तुम मुझे आवाज़ देती हो । आज तुम्हें क्या हो गया है जो बोलती नहीं हो। मेरे प्रश्न का तुरंत उत्तर दो ।” जब गुफा से कोई आवाज़ नहीं आई तो गीदड़ ने कहा, “ठीक है, मैं दूसरी गुफा में चला जाता

सिंह को गीदड़ की बात का विश्वास हो गया । उसने सोचा कि रोज गुफा उत्तर देती है, आज मेरे भय से मौन है । इसलिए गुफा के बदले मुझे ही गीदड़ को जवाब देना चाहिए । यह सोचकर उसने कहा, “गुफा में कोई नहीं है. तुम निर्भय होकर अन्दर चले आओ।” ।

सिंह की आवाज़ सुनकर गीदड़ को अब कोई शंका नहीं रही । उसने वहाँ से खिसकना ही उचित समझा । जाते-जाते उसने सिंह से कहा, “हे । सिंह ! अब तुम रात भर गुफा में ही आराम करो । मैं यहाँ से जा रहा हूँ।” इसलिए कहा गया है कि संकट आने से पहले ही उसका सही उपाय करने वाला सुखी रहता है।

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