Hindi Essay, Story on “Me Aapka Naukar Hu, Begano Ka Nahi”, “मैं आपका नौकर हूं, बैंगनों का नहीं ” Hindi Kahavat.

मैं आपका नौकर हूं, बैंगनों का नहीं 

Me Aapka Naukar Hu, Begano Ka Nahi

 

किसी सेठ के यहां एक खुशामदी रसोइया नौकर था। एक दिन सेठ ने कहा, “जोशी, बैगन से बढ़कर दुनिया में दूसरी तरकारी नहीं है।”

“हां बाबू, इसीलिए तो भगवान ने उसके सिर पर मुकुट दिया है।”

रसोइये ने दूसरे दिन खुब मसाले डालकर बैगन की तरकारी बनाई, सेठ ने डटकर खाई और तरकारी के स्वाद से सेठ रोटी भी सवाई खा गये।

परिणामस्वरूप दूसरे दिन सेठ के पेट में जोरों का दर्द हुआ। मन में खयाल आया, हो न हो, यह बैंगन की तरकारी खाने का फल है। रसोइये से बोले. “भंटा बहुत खराब तरकारी है, इसी ने मेरे पेट में दर्द पैदा कर दिया।”

रसोइया बोला, “बाबू, इसीलिए तो बंगाली लोग इसे बेगुन (बिना गुणवाला) बोलते हैं-जिसमें कोई गुण नहीं है।”

सेठ ने कहा, “तुम उस दिन तो बैंगनों की इतनी तारीफ करते थे, आज ऐसा कहते हो?”

“बाबू, आपने भी तो उस दिन बैंगन की तारीफ की थी, और आप जानिए. मैं आपका नौकर हूं, बैंगनों का नहीं।”

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