Hindi Essay, Paragraph on “Shishtachar ”, “शिष्टाचार”, Hindi Anuched, Nibandh for Class 5, 6, 7, 8, 9 and Class 10 Students, Board Examinations.

शिष्टाचार

Shishtachar 

Essay # 1

व्यक्ति का व्यवहार उसके चरित्र का दर्पण है। अच्छे आचार-व्यवहार वाले व्यक्ति को सभी पसन्द करते हैं। जबकि दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्ति को कोई पसन्द नहीं करता। दयालु होना, नम्र स्वभाव का होना और दूसरों का ध्यान रखना अच्छे आचरण में आते हैं। इसका साधारण-सा अर्थ है कि हमें अपने साथ रहने वाले लोगों और अपने वातावरण के प्रति संवेदनशील होना चाहिये एवं सबके साथ यथोचित व्यवहार करना चाहिये।

एक व्यक्ति के अच्छे आचरण से पता चलता है कि उसका लालनपालन किस तरह के परिवार में हुआ है। उसके संस्कार कैसे हैं। किसी का व्यवहार न केवल उसके, बल्कि उसके परिवार वालों के बारे में बहुत कुछ बताता है। क्योंकि हमें अच्छी या बुरी आदतें घर से ही पड़ती हैं। बच्चे सदैव अपने माता-पिता तथा बड़ों की नकल करते हैं। परिणामतः परिवार के वातावरण के अनुरूप ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है।

हमें अपने वचन अथवा कार्यों द्वारा किसा भा व्याक्त का मन दुखाना चाहिये। हमें सदैव दूसरों के प्रति उदार एवं नम्र होना चाहि दूसरा व्यक्ति बोल रहा हो तो उसे सुनना चाहिये, बीच में नहीं। चाहिये। घर या बाहर कहीं भी गन्दगी नहीं फैलानी चाहिये। सब थूकना, कार या घर में तेज गाने बजाना इत्यादि अच्छी आदतें नहीं हैं.

एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति हमेशा शिष्ट होगा। किन्तु केवल एक और विद्यालय में जाने से ही किसी में अच्छे गुण नहीं आ जाते।

 

Essay # 2

शिष्टाचार

Good Manners

शिष्टाचार ही मनुष्य को मनुष्य बनाता है । शिष्टाचार का महत्त्व जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में है । हमें बुजुर्गों का आदर करना चाहिए तथा कनिष्ठों के प्रति स्नेह का भाव रखना चाहिए । घर के कार्यों में हमें एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए । अतिथियों का उचित सम्मान करना चाहिए । हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए । विद्यालय में अनुशासन का पालन करना भी शिष्ट आचरण है । हमें शिक्षकों का आदर करना चाहिए। कमजोर छात्रों के प्रति सहयोग की भावना रखनी चाहिए । चाहे हम कहीं भी रहें, दूसरों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए । जब कोई किसी भी तरह से हमारी सहायता करे, हमें उसको ‘धन्यवाद’ कहना चाहिए । आम बोलचाल में ‘कृपया’, ‘जी’ आदि शब्दों का प्रयोग करना चाहिए । शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों तथा वृद्धों की यथासंभव मदद करनी चाहिए। शिष्टाचार के पालन में कुछ भी व्यय नहीं करना पड़ता है, जबकि इससे हमें बहुत कुछ प्राप्त हो सकता है।

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