Hindi Essay, Paragraph on “Jeb Kharch – Pocket Money”, “जेब खर्च – पॉकेट मनी”, Hindi Anuched, Nibandh for Class 5, 6, 7, 8, 9 and Class 10 Students, Board Examinations.

जेब खर्च – पॉकेट मनी

Jeb Kharch – Pocket Money

माता-पिता अपने बच्चों को प्रति माह खरचने के लिये जो पैसे देते हैं उसे जेब खर्च या पॉकेट मनी कहते हैं। अमेरिका में इसे अलाउएंस या भत्ता कहते हैं। एक बच्चा इस पैसे को अपनी मर्जी से जैसे चाहे खर्च कर सकता है। कई बार माता-पिता बच्चों को पैसे कैसे और कहाँ-कहाँ व्यय करने चाहिये यह समझाने का भी प्रयास करते हैं।

मेरा जेब खर्च कोई निश्चित नहीं है। मेरे पिताजी एक व्यवसायी हैं। जब कभी उनका व्यापार अच्छा चलता है तब वह मुझे जेब खर्च के लिये खूब सारे पैसे दे देते हैं। पर अगर उनका व्यापार मंदा होता है तो मुझे बहुत कम पैसे मिलते हैं।

मैं अपने सभी पैसे खर्च नहीं करता। हर माह कुछ पैसे मैं बैंक अपने बचत खाते में जमा कराता हूँ। मुझे शतरंज खेलना बहुत पसन्द है कभी-कभी इस खेल पर लिखी कोई किताब खरीद कर पढ़ता हूँ। मेरे पास शतरंज पर लिखी पुस्तकों का एक अच्छा संग्रह है। कोई अच्छी फिल लगती है तो मैं अपने दोस्तों के साथ सिनेमा देखने जाता हूँ। कभी-कभी दा रेस्तराँ में दोपहर का भोजन करने भी एक साथ जाते हैं। अगर मुझे कोई गीत अच्छा लगता है तो मैं अपने जेब खर्च से कैसेट या सी.डी. खरीदता हूँ।

मेरी एक बहन है जो मुझसे छोटी है। उसे अभी जेब खर्च नहीं मिलता। कभी-कभी मैं उसे कुछ खरीदने या व्यय करने के लिये कुछ पैसे दे देता हूँ। कुछ-कुछ महीनों में मैं अपना अधिकतम जेब खर्च बचा लेता हूँ। लेकिन कई बार तो पैसे बिल्कुल नहीं बच पाते।

देखा जाये तो बच्चों को जेब खर्च देने का विचार अच्छा है। इससे बच्चों को पैसों का मूल्य समझने में सहायता मिलती है। बच्चे पैसों को परे माह किस तरह व्यय करना है यह योजना भी बनाना सीख लेते हैं। जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को आवश्यकता से अधिक पैसे न दें जिससे वे फ़िजूल खर्च न बनें । प्रति माह के निश्चित पैसे जल्दी समाप्त कर लेने पर माता-पिता को कठोरता का व्यवहार करना चाहिये और अतिरिक्त पैसे नहीं देने चाहिये।

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