Hindi Essay on “Swasthya hi Dhan Hai”, “स्वास्थ्य ही धन है”, for Class 10, Class 12 ,B.A Students and Competitive Examinations.

स्वास्थ्य ही धन है

Swasthya hi Dhan Hai

मानव जीवन एक बहते हुए झरने के समान है। जिस प्रकार झरने का जीवन जल है। वैसे ही मनुष्य का जीवन स्वास्थ्य है। झरने में पानी न हो अथवा उसका पानी सूख जाए तो झरना, झरना नहीं रहता। उसकी सत्ता ही मिट जाती है। इसी प्रकार स्वास्थ्य के बिना मनुष्य का जीवन, जीवन नहीं रहता अर्थात् उसके जीवन में कोई रस नहीं रहता, जीवन भी मृत्यु के समान प्रतीत होता है। स्वास्थ्य के बिना धनवान् व्यक्ति भी धन का उचित लाभ नहीं उठा सकता, भौतिक सुखों को प्राप्त नहीं कर सकता। यदि व्यक्ति स्वस्थ न हो तो उसे सोने की चमक और चांदी की खनक भी लुभावनी नहीं लगती क्योंकि रोग, शारीरिक पीड़ा उसके मन में ऐसी मानसिक वेदना उत्पन्न करते हैं कि उसे अपना जीवन नरक तुल्य प्रतीत होता है। स्वास्थ्य विहीन मनुष्य को स्वादिष्ट से स्वादिष्ट भोजन भी विष के समान प्रतीत होता है, संगीत की मधुर स्वर लहरियां उसे आग के समान जलाने वाली लगती हैं। प्रकृति सुषमा उसे अंगारों के समान प्रतीत होती है। इसके विपरीत स्वस्थ व्यक्ति जीवन का रस पूरी तरह से भोगता है। घण्टों काम करने पर भी वह थकता नहीं है, निराशा उसके पास तक नहीं फटकती। अच्छा स्वास्थ्य व्यक्ति के मन में उत्साह, जोश और उमंग भर देता है। वह जिस काम में भी हाथ डालता है उसमें सफल होता है। हमारे सामने अपने पूर्वजों के अनेक उदाहरण हैं जो अपने स्वास्थ्य के कारण ही दीर्घायु हुए। जीवन भर वे निश्चिन्त रहे। दुःख से दु:खी न हुए और सुख के लिए वे कभी लालायित न रहे। भीम जैसे योद्धा भी हमारे ही देश में हुए हैं जिसमें कहते हैं दस हज़ार हाथियों की शक्ति थी। यदि हम भी अपने पूर्वजों की तरह सुखमय और चिन्ता रहित जीवन बिताना चाहते हैं तो हमें भी अपने स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देना होगा। यह एक ऐसा धन है जिसका मुकाबला दुनिया का कोई धन नहीं कर सकता। स्वस्थ रहने के लिए हमें स्वास्थ्य के नियमों का पालन करना चाहिए और अति से बचना चाहिए। तात्पर्य यह है कि हमें अति भोजन, अति जागरण, अति शयन और अति कार्य से बचना चाहिए। हर कार्य-भोजन, सोना, जागना, पढ़ना, खेलना इत्यादि, हमें उचित समय पर और उचित। मात्रा में ही करना चाहिए। महात्मा गाँधी ने लिखा है- “जो जिह्वा के स्वाद में पड़ा, उसका स्वास्थ्य अवश्य नष्ट हुआ।’ वैण्डेल फिलिप्स ने लिखा है-स्वास्थ्य परिश्रम में वास करता है और वहां तक पहुँचने के लिए परिश्रम को छोड़ कर अन्य कोई मार्ग नहीं है।” मेवलिन की यह दलील भी स्मरणीय है-“जल्दी सोना और जल्दी जागना, मनुष्य को स्वस्थ, धनवान और बुद्धिमान बनाता है।”

(Early to bed and early to rise,makes a man healthy, wealthy and wise.)

अच्छा स्वास्थ्य संसार का सर्वोत्तम रत्न है। अतः विद्यार्थी जीवन में हमें इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसी आयु में बना हुआ स्वास्थ्य आय भर काम आता है और इसकी अवहेलना करने पर जीवन भर दु:खी  रहना पड़ता है और पछताना पड़ता है किन्त चिडियों के चुग जाने पर पछताने का कोई  लाभ नहीं होता। इसलिए पहले स्वास्थ्य फिर शिक्षा और फिर आमोद-प्रमोद इस सूत्र पर हमें आज से ही अमल करना शुरू कर देना चाहिए।

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