Hindi Essay on “Subah ki Sair”, “सुबह की सैर”, for Class 5, 6, 7, 8, 9 and Class 10 Students, Board Examinations.

सुबह की सैर

Subah ki Sair

निबंध नंबर :- 01

सैर सदा से ही सबसे लाभदायक व्यायाम माना गया है और सुबह की सैर को सबसे उत्तम माना गया है।

सुबह के समय वातावरण में इतना प्रदूषण नहीं होता और न ही वाहनों की भीड़ होती है। पक्षियों की चहचहाहट से पूरी प्रकृति खिल उठती है। धीमी सुगंधित हवा हमारे शरीर में नई स्फूर्ति भर देती है।

इस तरह के वातावरण में निकलने से हम चुस्त और उत्साहित महसूस करते हैं। हमारे मन में अच्छे विचार जन्म लेते हैं और हमारा पूरा दिन खुशी से बीतता है।

सूरज की चढ़ती किरणों से भी हमारे शरीर को अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। उनमें जीवन चलाने की शक्ति होती है अत: हमारे शरीर में भी वह शक्ति भर जाती है।

सुबह की सैर के लिए सुबह उठना भी अपने आप में बहुत लाभदायक होता है।

 

निबंध नंबर :- 02

प्रातः काल का भ्रमण

Pratahkal ki Sair

भूमिका- मनुष्य का सबसे पहला कार्य है अपनी सेहत की रक्षा करना, क्योंकि हमारे बहुत से कर्त्तव्य हैं जो बिना अच्छे स्वस्थ के पूरे नहीं हो सकते। स्वास्थ्य रक्षा के अनेक साधन हैं। इन साधनों में प्रात:काल का भ्रमण विशेष महत्त्व रखता है। पुष्ट और निरोग शरीर के लिए जहां संतुलित भोजन की आवश्यकता होती है वहाँ शारीरिक श्रम भी जरूरी है। शारीरिक श्रम अनेक क्रियाओं द्वारा होता है। प्रात:कालीन भ्रमण भी इसी प्रकार का साधन है जिससे शरीर स्वस्थ और शक्ति सम्पन्न रहता है।

भ्रमण का अर्थ- प्रातः काल भ्रमण का शाब्दिक अर्थ है प्रातः काल के समय घूमना। प्रातः काल का भाव सूर्योदय से पूर्व है। प्रातः काल के भ्रमण में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जहाँ वायु स्वच्छ हो वहाँ घूमना ही लाभकारी होता है। विशेष ऋतुओं में प्रात: काल के भ्रमण में विशेष वस्त्र धारण करना हितकर होता है।

प्रकृति का स्वास्थ्य लुटाना- प्रातः काल प्रकृति दोनों हाथों से स्वस्थ लुटाती है। विभिन्न ऋतुओं की सुगन्धित वायु इसी समय चलती है। सुगन्धि से भरे फूल खिलखिलाकर हँसते हुए कितने मोहक लगते हैं। चारों और की हरियाली नेत्रों को मस्ती से भर देती है। पक्षियों का चहचहाना मन को प्रसन्नता से भर देता है। प्रकृति के मनमोहक दृश्यों को देखकर मनरूपी मोर भी नाच उठता है। ऐसे समय में भ्रमण करने वाला मनुष्य स्वस्थ ही नहीं, दीर्घ आयु वाला भी होता है।

प्रातः भ्रमण से लाभ- प्रातः काल भ्रमण करने के अनेक लाभ होते हैं। इसके इससे सबसे बड़ा और पहला लाभ यह है कि प्रातः काल देर तक विस्तर पर सोने की अपेक्षा जल्दी जागना पड़ता है और इस प्रकार सुस्ती को त्याग कर मनुष्य चुस्त हो जाता है। प्रातः काल के भ्रमण से शरीर में फुर्ती और नए जीवन का संचार होता है। मन खुशी से भर जाता है। सारा दिन काम करके मनुष्य थकता नहीं। मन के मलिन विचार दूर होते हैं। प्रातः काल के भ्रमण से पाचन शक्ति बढ़ती है। शुद्ध हवा जब नाक के मार्ग से शरीर में प्रवेश करती है तो रक्त भी शुद्ध होता है। मोती के समान ओस की बूदों से सजी घास पर चलने से मनुष्य का मस्तिष्क रोगों से मुक्त होता है। प्रातः काल के भ्रमण से मनुष्य का मानसिक विकास भी होता है।

प्रातः काल के भ्रमण के लिए कुछ व्यय नहीं करना पड़ता है। अत: सभी वर्गों के लिए हितकर है। वृद्धावस्था में व्यायाम करना सम्भव नहीं होता है अतः प्रात:काल का भ्रमण विशेष उपयोगी माना जाता है।

उपसंहार- शरीर का अरोग्य होना सभी के लिए आवश्यक है। रोगी शरीर मनुष्य के लिए बोझ बन जाता है। अत: जीवन को सुखमय बनाने के लिए प्रात:काल का भ्रमण अधिक उपयोगी एवं व्यय रहित होता है।

निबंध नंबर :- 03

सुबह की सैर

Subah ki Sair

पायाम हमारे शरीर और बुद्धि दोनों को स्वस्थ रखता है। सैर व्यायाम का सबसे अच्छा रूप है जो हर उम्र के व्यक्ति को रुचिकर लगती है। प्रातः काल का समय सैर के लिये सबसे सर्वोत्तम माना जाता है। सुबह के समय ताजी हवा चलती है, हर ओर शान्ति होती है। सूर्य की हल्की-हल्की किरणें सुहावनी लगती हैं।

मैं प्रति दिन सैर के लिये जाता हूँ। मेरा मित्र रजत भी मेरे साथ जाता है। कई बार जब वह नहीं आता तो मैं अकेले भी चला जाता हूँ। रजत मेरा सहपाठी है और मेरे घर के पास ही रहता है। सैर पर जाने के लिये मैं प्रात: पाँच बजे उठ जाता हूँ।

हम शहर के बाहर की ओर जाने वाली एक सड़क पर तेजी से चलते हैं। सुबह की ठण्डी हवा, चिड़ियों की चहचहाहट और सूर्योदय का मनोहर दृश्य हमारी सैर को लुभावना बना देता है।

यह वातावरण स्वार्गिक आनन्द की अनुभूति कराता है और मन कविता करने को मचल उठता है।

कुछ समय तक हम दौड़ते हैं और फिर धीरे-धीरे चलने लगते हैं। हमारे पड़ोस में एक सुन्दर बगीचा है। हम थोड़ी देर के लिये अपने जूते उतारकर ओस पड़ी हुयी घास पर नंगे पैर चलते हैं।

प्रति दिन हमारा एक घंटे से अधिक समय सैर में बीतता है। सवा छ: बजे तक हम घर वापिस आ जाते हैं। अपना दिन प्रारम्भ करने के लिये हम तरोताजा और प्रसन्नचित होते हैं। सुबह का सैर का मन-मस्तिष्क पर चमत्कारी प्रभाव पड़ता है जो सारा दिन व्यक्ति को ताज़ा रखता है।

निबंध नंबर :- 04

प्रातःकाल की सैर

Pratahkal ki Sair

प्रात:काल की सैर स्वस्थ जीवन की कुंजी है। सुबह के समय जब सूर्य उग रहा होता है, समय स्वच्छ वायु में साँस लेने से शरीर को अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है, मन-मस्तिष्क शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है तथा आलस्य दूर भाग जाता है। प्रात:कालीन सैर से रक्त संचार बढ़ता है जिससे शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। नंगे पाँव घास पर चलने से आँखों की रोशनी में वृद्धि होती है तथा नेत्र रोगों में लाभ होता है। सुबह के समय आधा घंटा निकालकर सैर कर लें, तो अनगिनत लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस समय प्रकृति सौंदर्य देखने लायक होता है। वृक्षों पर चहचहाते रंग-बिरंगे पक्षी, क्षितिज से मंद-मंद चलती पवन, चारों और फैली हरियाली तथा यातायात के शोर-शराबे से दूर। प्रत्येक व्यक्ति को सुहावने दिन के आरंभ का आभास मिलता है। अतः स्वास्थ्य के लिए भी प्रातः कालीन सैर अत्यावश्यक है।

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