Hindi Essay on “Samay ka Sadupyog”, “समय का सदुपयोग”, Hindi Nibandh for Class 5, 6, 7, 8, 9 and Class 10 Students, Board Examinations.

समय का सदुपयोग

Samay ka Sadupyog

निबंध नंबर : 01

समय एक ऐसा अमूल्य धन है जिसका लौटकर आना असंभव है। हर दिन हम अनेक वस्तुएँ खोकर पा सकते हैं, उन्हें बढ़ा सकते हैं परंतु खोया समय कभी लौट कर नहीं आता।

समय का उचित प्रयोग ही सदुपयोग है। अपने सभी कार्य सही समय पर करना व खाली समय का प्रयोग कुछ नया सीखने के लिए करना, सदुपयोग है।

समय का महत्त्व समझने पर हम निरंतर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते जाते समय पर कार्य न करने वाले समय की तेज गति से पीछे रह जाते हैं। समय पर निकल जाने पर हाथ मलते रहने से कुछ नहीं मिलता, जैसे कहा भी गया है, ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’।

महान आविष्कारक जेम्सवाट, मैडम क्यूरी, एडीसन, सभी दिन-रात एक कर परिश्रम करते थे। सूर्य, धरती, चंद्रमा, ऋतुएँ सभी समय के अनुसार कार्य करती हैं। सही समय पर यदि कोई ऋतु न आए तो उसका भरपूर आनंद नहीं आता।

विद्यार्थी जीवन सीखने का समय है। हमें दुनिया की कई नई पुरानी बातें, ज्ञान-विज्ञान, खेल-कूद आदि सीखने हैं। अत: जो सभी समय हमारे पास है उसका सही-सही उपयोग कर ही हम पढ़ाई व अन्य क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

 

निबंध नंबर : 02

 

समय का सदुपयोग

Samay ka Sadupyog

भूमिका- मानव जीवन में समय का बड़ा महत्त्व है। यह एक बहुमूल्य वस्तु है। बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता। क्षण-क्षण द्वारा निर्मित जीवन समय की धारा में वह जाता है। अतः जीवन के लिए एक-एक क्षण बड़ा महत्त्व रखता है। समय किसी का दास नहीं है वह अपनी गति से चलता है। समय का महत्त्व न पहचानने वाला व्यक्ति अपना ही सत्यानाश करता है। किसी ने सच ही कहा है- बीता वक्त हाथ नहीं आता।

समय एक अमूल्य धन- समय एक ईश्वरीय वरदान है। हमारा फर्ज बनता है कि सुबह उठ कर जो कार्य करना है उसको निश्चित कर लें और दिन भर कार्य करके उसे समाप्त कर डालें। विद्यालय में जो समय बचता है उसका सदुपयोग अन्य कलाओं को सीखने में व्यस्त करें। व्यर्थ की गप्पों से अपने समय को बर्बाद न करें। आज का काम कल पर नहीं छोड़ना चाहिए। समय कभी आता नहीं, यह तो जाता है। यह वह हिरण है जो एक बार हाथ से निकल गया तो लाख हरी-हरी पत्तियां दिखाने पर भी हाथ नहीं आएगा यह वह धन है जिसकी एक-एक कोड़ी करोड़ों कीमत की है। समय को खोना और जीवन से हाथ धोना एक ही बात है। भविष्य में क्या होगा, यह कहा नहीं जा सकता। इसलिए मानव को चाहिए कि वह अपने सभी कार्य नियत समय पर करता रहे।

समय एक ऐसा अमूल्य धन है जिसे खोना नहीं चाहिए। समय बहुतजल्दी व्यतीत हो जाता है। बाल्य काल म बालक नासमझ होता है। यौवन में जीवन की व्यवस्थाएं इतनी होती हैं कि वह कर्त्तव्य की ओर ध्यान ही नहीं दता और वृद्धावस्था में उसमें इतनी शक्ति नहीं होती। समय निकल जाने पर वह पश्चाताप करता है। समय को अमूल्य धन इसलिए कहा गया कि धन की हानि हो जाए तो उसकी क्षति पति हो सकती है। पर समय की हानि हो जाए तो उसकी क्षति पूर्ति नहीं हो सकती। एक बार एक मित्र ने दूसरे से पूछा कि तुम्हारे जीवन का क्या लक्ष्य है तो वह कहता है, कि मजे से समय गुजार रहे हैं। पता नहीं मजे का अर्थ वे क्या समझते हैं, पर जिसने समय के मूल्य को नहीं समझा, समझो उसने कुछ नहीं किया। इस तहरह मजे से रहने से समय गुजारना कोई महत्त्वपूर्ण बात नहीं है। कौआ भी जीता है, वह भी अपना पेट भरता है। आदर्श महापुरुषों की जीवनी पढ़िए, वे अपना एक क्षण का समय भी व्यर्थ नहीं गुजारते थे। देश-विदेश में लोग समय का कितना ध्यान रखते थे, ये उनके इतिहास से हमें ज्ञात होता है। जो समय का सदुपयोग करता है, जो सदा उद्योग में लगा रहता है, जो जीवन में देश या समाज के लिए कुछ करके दिखाता है। वह मरने पर अमर हो जाता है। महात्मा कबीर जी ने आलसी व्यक्ति को चेतावनी देते हुए कहा है- जो व्यक्ति रात सोकर, दिन खाकर गवां देते हैं। वे इस हीरे जैसे जीवन को व्यर्थ में गवां रहे हैं। इस प्रकार समय का ध्यान न रखने वाला मनुष्य पश्चाताप करता है।

सुखों की प्राप्ति- समय का सदुपयोग करने वाले को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति अपना कार्य समय पर करता है उसेकोई व्यग्रता नहीं रहती। समय पर कार्य करने वाला व्यक्ति अपना ही भला नहीं करता वरन् अपने परिवार, ग्राम तथा राष्ट्र को उन्नति में भी सहायक होता है। समय के सदुपयोग से मानव धनवान, अकलमन्द तथा शक्तिशाली हो सकता है। लक्ष्मी उसकी दासी बन जाती है। यदि ध्यानपूर्वक अपने इतिहास पर दृष्टि दौड़ाएं तो पता चलता है कि जितने भी महान् व्यक्ति हुए हैं उनकी महानता के पीछे समय का मूल मन्त्र छिपा हुआ है।

समय का प्रत्येक क्षण बहुमूल्य- समय का मूल्य समय के बीत जाने पर ज्ञात होता है। समय की एक क्षण की देर भी कभी-कभी बड़ी महंगी पड़ती है। वायुयान, रेलगाड़ी एवं बस आदि वाहन कभी भी किसी की प्रतीक्षा नहीं करते। समय के दुरुपयोग से दु:ख और दरिद्र ही हाथ लगते है। आज बहुत से नवयुवक अवकाश के दिनों में निठल्ले घर पर बैठे रहते हैं अथवा बुरी संगति में पड़ कर अपने समय को बर्बाद कर देते हैं। समय का दुरुपयोग एक पाप है जो इस पाप के कीचड़ में गिर जाता है, उसका उद्धार भी नहीं हो सकता। लखपति व्यापारी समय के चूक जाने से भिखारी बन सकता है। पाँच मिन्ट देर से स्टेशन पर पहंचने से गाड़ी छट जाती है और सारे कार्यक्रम धूल में मिल जाते हैं। देरी से गया हुआ छात्र परीक्षा में नहीं बैठ सकता। हमें सदा समय के दुरूपयोग से बचना। चाहिए।

समय का सदुपयोग वाल्यकाल से ही करना चाहिए– समय का महत्त्व समझते हुए, हमें इसका सदुपयोग। बचपन से ही करना चाहिए। हमें वाल्यकाल से ही सदुपयोग की आदत डालनी चाहिए। पढ़ने के समय पढ़ना चाहिए और खेलने के समय खेलना चाहिए। जो व्यक्ति स्वयं को दैनिक कार्यों में व्यस्त रखेगा, वह व्यक्ति कभी व्यर्थ केकामों के समय नष्ट नहीं करेगा।

उपसंहार- समय का सदपयोग प्रत्येक विद्यार्थी को नहीं अपित प्रत्येक व्यक्ति को भी करना चाहिए। जिस प्रकार तार और गोली निकल जाने पर वे वापिस नहीं आती हैं, उसी प्रकार बीता हआ समय वापिस नहीं आता है। मनुष्य का जीवन बड़ा छोटा है। इसे गंवाना नहीं चाहिए।

निबंध नंबर : 03

समय का सदुपयोग

Samay ka Sadupyog

समय का सदुपयोग का अर्थ है-समय को बर्बाद न करना और उसे अच्छे कामों में लगाना। इसी के पालन द्वारा मानव अपने जीवन को सफल बना सकता है। विद्यार्थियों पुजारी होने से वे नियमति रूप से अध्ययन करते हैं। वे ठीक समय पर विद्यालय पहुंचते हैं। उन्हें परीक्षा के अवसर पर अधिक परिश्रम नहीं करना क्योंकि वे समय को गपशप या बेकार में बरबाद नहीं करते। जब भी  खाली समय मिलता है, वे उसे पढ़ने में लगा देते हैं। और अन्त में परीक्षा में अव्वल आते हैं।

अध्ययन के उपरान्त वे कोई व्यवसाय, व्यापार या नौकरी करते हैं। हर काम में समय की पाबंदी आवश्यक होती है। आप डॉक्टर या वकील के व्यवसाय को ही लीजिए। यदि डॉक्टर ठीक समय पर औषधालय न खोले तो रोगी दूसरे डॉक्टर के पास चले जाते हैं या ईलाज के अभाव में रोगी अपने प्राण गँवा बैठते हैं। और डॉक्टर को अपने यश एवं धन की क्षति उठानी पड़ती है। यही स्थिति वकीलों की भी है, यदि वे समय पर अपने चैंबर में न बैठे या अदालत न पहुँचे तो उनका हाल भी डॉक्टर जैसा ही होता है।

इसी प्रकार एक व्यापारी तभी उन्नति कर सकता है जब वह समय पर दुकान खोलता या बन्द करता है। नौकरी में तो समय की पाबंदी न करने से मालिक या अधिकारी नाराज़ हो जाते हैं और तंग आकर उसे नौकरी से निकाल देते हैं। उसकी इस गंदी आदत का दंड बेचारे उसके अबोध बच्चों पर पड़ता है जो कि पिता के रोज़गार के अभाव में भूखों मरते हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को समयनिष्ठ होना चाहिए।

समयनिष्ठा मनुष्य के लिए अत्यंत उपयोगी है। समय के पाबंद व्यक्ति के पास कभी भी समय का अभाव नहीं रहता। उसके सभी काम ठीक समय पर पूर्ण हो जाते हैं। वह समाज का सच्चा सेवक और विश्वासपात्र बन जाता है। जो मनुष्य समय का महत्व नहीं समझता, वह अपना जीवन कभी सुखी नहीं बना सकता।

अभिभावकों का घर पर और शिक्षकों का विद्यालय में यह है कि उनके बच्चे कभी आलसी न बनें। वे समय-समय पर अपने व को समय के सदुपयोग का पाठ पढ़ाते रहें।

समय का कोई मूल्य नहीं होता। वह अमूल्य होता है। अतः प्रत्येक विवेकशील व्यक्ति को समय का मूल्य समझकर उसका सदेव सदपयोग करना चाहिए।

5 Comments

  1. Raima July 3, 2019
  2. shankar September 16, 2019
  3. PAGAL September 17, 2019
  4. Yuvraj December 7, 2020
  5. Sanjay Dewangan January 27, 2021

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