Hindi Essay on “Mera Priya Khel”, “मेरा प्रिय खेल”, for Class 5, 6, 7, 8, 9 and Class 10 Students, Board Examinations.v

मेरा प्रिय खेल

Mera Priya Khel

 

3 Hindi Essay on “Mera Priya Khel”

निबंध नंबर :- 01

कबड्डी भारत का सबसे पुराना खेल है। क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल जैसे खेलों के बीच कबड्डी मेरा प्रिय खेल है। इसमें तेज दिमाग और चुस्त शरीर दोनों चाहिए।

‘कबड्डी सीधा-सादा खेल है जिसमें किसी विशेष सामान की भी आवश्यकता नहीं होती। खेल के मैदान के बीचोंबीच रेखा खींच, खिलाड़ियों को दो टीमों में बाँटा जाता है। पहली टीम का खिलाड़ी दूसरी टीम के पाले में

‘कबड्डी-कबड्डी’ कहता उनके एक खिलाड़ी को छूकर अपने पाले में वापिस आता है। साँस टूटने पर या उस टीम के किसी खिलाड़ी द्वारा पकड़े जाने पर आउट माना जाता है। अधिक अंक बनाने वाली। टीम विजयी होती है।

भारत के गाँवों में यह सस्ता खेल बहुत प्रसिद्ध है। मुझे भी बनावट से परे यह खेल बहुत अच्छा लगता है।

निबंध नंबर :- 02

मेरा प्रिंय खेल

Meri Priya Khel

मैं बहुत-से आन्तरिक एवं बाह्य खेल खेलता हूँ किन्तु बैडमिंटन मुझे सर्वाधिक प्रिय है। यह बहुत रोमांचक खेल है।

बैडमिंटन के खेल में दो टीमें होती हैं। जिसमें प्रत्येक में एक या दो खिलाड़ी हो सकते हैं। एक कोर्ट में दो टीमें आमने-सामने खेलती हैं। कोर्ट एक जाल द्वारा विभाजित होता है। जाल (नेट) के अतिरिक्त खेलने के लिये रैकेट एवं शटल कॉक (चिड़िया) की भी आवश्यकता होती है। शटल कॉक पंखों एवं कॉर्क से बनी होती है।

बैडमिंटन खेलने के लिये फुरतीले शरीर एवं कौशल की आवश्यकता होती है। खिलाड़ियों की भुजाएँ एवं पाँव मजबूत एवं उन्हें चुस्त-दुरुस्त होना चाहिये। उन्हें शटल के पीछे कोर्ट में तेजी से इधर-उधर दौड़ना पड़ता है।

मैं बैडमिंटन का एक अच्छा खिलाड़ी हूँ और खेलने में मुझे बहुत आनन्द आता है। मैं अपने विद्यालय की जूनियर टीम का कप्तान हूँ। मेरे मित्र और मैं प्रतिदिन सायंकाल बैडमिंटन खेलते हैं। अवकाश के दिन मैं अपने पिताजी और बहन के साथ खेलता हूँ। मुझे यह खेल इतना पसन्द है कि मेरी इसे जीवन भर खेलने की इच्छा है। अपर्णा पोपट एवं पी. गोपीचन्द मेरे प्रिय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।

 

निबंध नंबर :- 03

मेरा प्रिय खेल

My Favourite Game

खेलों का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। ये हमारे शरीर को स्वस्थ तथा मस्तिष्क को दृढ़ तथा उत्साही बनाते हैं । अत: खेलों को हमें अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेना चाहिए । मुझे खेल-कूद से बहुत लगाव है । मैं फुटबाल, बॉलीवाल, टेबल टेनिस, हॉकी आदि खेलों को खेलना पसंद करता हूँ। परन्तु हॉकी मेरा सबसे प्रिय खेल है । अपने स्कूल के मैदान में मैं प्रतिदिन हॉकी खेलता हूँ। यह हमारा राष्ट्रीय खेल है। लगभग तीस वर्षों तक भारत हॉकी का विश्व विजेता रहा है। हॉकी की एक टीम में ग्यारह खिलाड़ी होते हैं । इनमें से पाँच फारवर्ड, तीन हाफ बैक, दो फुल बैक और एक गोलरक्षक होता है। एक हॉकी मैच डेढ़ घंटे का होता है । इस खेल को सीखना बहुत आसान है । परन्तु नियमित अभ्यास से ही हॉकी का अच्छा खिलाड़ी बना जा सकता है। मेरी आकांक्षा है कि मैं हॉकी का एक अच्छा खिलाड़ी बनें।

शब्दभंडार

मजबूत= सख्त । विश्वविजेता = पूरी दुनिया को जीतने अभिन्न अंग = अलग न होने वाला । आकांक्षा = अभिलाषा, इच्छा ।

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