Hindi Essay on “Deepawali”, “दीपावली”, for Class 5, 6, 7, 8, 9 and Class 10 Students, Board Examinations.

दीपावली

Deepawali

निबंध नंबर :- 01

 

दीपावली हिंदुओं का पावन त्योहार है। यह अक्टूबर-नवंबर के महीने में आता है।

दीपावली के दिन ही श्री राम चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। उनके आने पर पूरी अयोध्या नगरी को दीपों से सजाया गया था।

दीपावली के आने की तैयारी घर और दुकानों की साफ़-सफ़ाई और रंग-रोगन से होती है। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस के अवसर पर लोग अपने घरों के लिए नया सामान खरीदते हैं। सभी मित्र-संबंधी आपस में मुँह मीठा करवाते हैं।

दीपावली के दिन गणेश-लक्ष्मी का पूजन होता है। सभी रात में अपने घर को दीपों से सजाते हैं और पटाखे चलाते हैं। दीपावली की रात रोशनी की रात होती है।

 

निबंध नंबर :- 02

 

दीपावली

Deepawali

 

हिन्दू त्योहारों में दीपावली की महत्ता और लोकप्रियता सबसे अधिक है। कार्तिक की अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार असंख्य मोमबत्तियों, रंगीन बल्बों और दीपमालाओं से अमावस्या के गहन अंध कार को शरद् पूर्णिमा में बदल देता है। इनके प्रकाश के सामने आकाश के असंख्य तारे भी लज्जित होते हैं।

दीपों के इस त्योहार को किसी न किसी रूप में भारत की लगभग सभी जातियाँ मनाती हैं। सभी राज्यों के लोग इस त्योहार का अभिनंदन करते हैं। इस त्योहार के साथ अनेक पौराणिक एवं दंतकथाएँ जुड़ी हुई हैं। सुना जाता है कि धर्मराज युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ की समाप्ति इसी दिन हुई थी। ऐसा भी प्रचलित है कि श्री राम 14 वर्ष के वनवास के बाद सीताजी और लक्ष्मण के साथ इसी दिन अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने अयोध्या को घी के दीपों से सजाया था। घर-घर मिठाइयाँ बँटी थीं। तभी से यह त्योहार आनंद, उल्लास और विजय का प्रतीक बन गया। क्योंकि इसकी पृष्ठभूमि में श्री राम की विजय की पवित्र गाथा है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सागर मंथन होने पर आज ही के दिन देवी लक्ष्मी जी का आविर्भाव (जन्म) हुआ था। इसलिए इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। और लोग रातभर लक्ष्मी के आगमन में अपने घरों के द्वार खुले रखते हैं। व्यापारी वर्ग इस दिन को बहुत पवित्र मानते हैं और अपने पिछले वर्ष का हिसाब-किताब साफ करके नए बही-खाते आरंभ कर देते हैं।

आर्यसमाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण भी आज ही के दिन हुआ था इसलिए आर्यसमाजी इस त्योहार को बहुत पवित्र मानते हैं। इसी प्रकार जैनियों के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी को निर्वाण भी इसी दिन प्राप्त हुआ था अतः सारा जैन समाज दीपावली के इस त्योहार को पूरी श्रद्धा से मनाता है।

दीपावली से कुछ दिन पूर्व घरों, दुकानों और कार्यालयों में नए सिरे से लिपाई-पुताई और साफ-सफाई की जाती है। इससे मच्छरों और गंदगी का सफाया हो जाता है और हर स्थान स्वच्छ नज़र आने लगता है। बाजार भी चमकने लगते हैं। इस प्रकार दीपावली का त्योहार स्वच्छता का प्रतीक बन गया है। दीपावली पर संध्या समय सारा शहर दीपकों के प्रकाश से जगमगा उठता है। मिठाइयों, खिलौनों और पटाखों की दुकानों पर भीड लग जाती है। इस त्योहार पर लोग शुभकामनाओं के साथ अपने मित्रों और रिश्तेदारों के यहाँ मिष्ठान आदि भिजवाते हैं और आपसी मनमटाव भुलाकर जीवन को सुखी बनाने का प्रयास करते हैं।

इस प्रकार देश और जाति की समृद्धि का यह त्योहार अत्यंत मनोरम और महत्त्वपूर्ण है। इसलिए यह त्योहार केवल भारत में ही नहीं, विदेशों में भी मनाया जाता है।

निबंध नंबर :- 03

दीपावली

‘दीपावली’ रोशनी का त्योहार है। दीपावली की रात घर, दुकानें सभी को रोशनी से सजाया जाता है। यह हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण लोकप्रिय त्योहार है। दीपावली सम्पूर्ण भारत में मनायी जाती है। यह दिन कार्तिक माह की अमावस्या को (अक्टूबर या नवम्बर में) आता है।

घर-दुकानों को साफ करके उन्हें रंगा-पोता जाता है। भिन्न-भिन्न प्रकार के पकवान एवं मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। स्नेही बन्धुओं एवं सम्बन्धियों के घर उपहार एवं मिठाइयों का आदान-प्रदान किया जाता है। वैर-वैमनस्य को भुला कर लोग आपस में मिल कर त्योहार मनाते हैं। बच्चे एक माह पूर्व ही पटाखे चलाना प्रारम्भ कर देते हैं तो दीपावली की रात आतिशबाजी की रौनक में बड़े भी शामिल हो जाते हैं।

दीपावली की रात को धन-सम्पत्ति की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दुकानदार व व्यापारी इस दिन नये बही खाते खोलते हैं। यह दिन खुशी मनाने का, आमोद-प्रमोद का और उल्लास का है। लोग त्योहार के उत्साह में रंग-बिरंगे नये कपड़े पहन कर बाजारों और एक-दूसरे के घरों में जाते हैं। दीपावली के एक दिन पूर्व धनतेरस पर लोग नये बरतन, गहने इत्यादि खरीदते हैं।

दीपावली के साथ शरद ऋतु का आगमन होता है। चौदह वर्ष के बनवास के बाद रावण पर विजय प्राप्त कर जब भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता सहित अयोध्या वापिस आये तो अयोध्या-वासियों ने उनके आने की खुशी में घी के दीये जलाये थे। इसीलिये प्रति वर्ष यह त्योहार मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। हिन्दू इस त्योहार को बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह से मनाते हैं।

भारत के प्रत्येक हिस्से में यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है।

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